आज के समय में जब अधिकांश उपचार दवाइयों और सर्जरी पर निर्भर होते जा रहे हैं, वहीं प्राकृतिक और दवा-मुक्त चिकित्सा पद्धतियों की ओर लोगों का झुकाव तेजी से बढ़ रहा है। ऐसी ही एक प्रभावशाली और संरचित पद्धति है न्यूरोथेरेपी, जिसे वैज्ञानिक आधार देने का श्रेय डॉ. लाजपत राय मेहरा को जाता है। उनके द्वारा विकसित प्रणाली को आज LMNT (Dr. Lajpat Rai Mehra Neurotherapy) के नाम से जाना जाता है।
Dirghayuveda Wellness में न्यूरोथेरेपी को केवल एक तकनीक के रूप में नहीं, बल्कि एक समग्र उपचार दर्शन के रूप में अपनाया गया है, जहाँ रोग को दबाने के बजाय उसके मूल कारण को समझने और शरीर की स्व-उपचार क्षमता को सक्रिय करने पर जोर दिया जाता है।
डॉ. लाजपत राय मेहरा – जीवन और चिकित्सा दृष्टिकोण
डॉ. लाजपत राय मेहरा का जन्म वर्ष 1965 में अमृतसर में हुआ। प्रारंभ से ही उनका झुकाव मानव शरीर की संरचना और उसकी कार्यप्रणाली की ओर था। उन्होंने यह समझने का प्रयास किया कि आखिर क्यों कुछ रोग लंबे समय तक बने रहते हैं, जबकि बार-बार इलाज कराने के बावजूद पूर्ण राहत नहीं मिल पाती।
वर्ष 1947 के आसपास उन्होंने नसों पर आधारित उपचार पद्धति पर प्रयोग प्रारंभ किए। उनका मानना था कि शरीर में होने वाले अधिकांश रोगों की जड़ नर्व सिस्टम के असंतुलन में छिपी होती है। यदि नसों के माध्यम से मस्तिष्क और अंगों के बीच सही संचार स्थापित कर दिया जाए, तो शरीर स्वयं ठीक होने लगता है।
न्यूरोथेरेपी (LMNT) का विकास और नामकरण
शुरुआती वर्षों में इस पद्धति को एक वैकल्पिक प्रयोग के रूप में देखा गया, लेकिन समय के साथ इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे। कमर दर्द, गर्दन दर्द, जोड़ों की समस्या और नसों से जुड़े विकारों में राहत मिलने के बाद यह स्पष्ट होने लगा कि यह केवल संयोग नहीं है।
वर्ष 1976 में इस चिकित्सा पद्धति को औपचारिक रूप से “न्यूरोथेरेपी” नाम दिया गया। इसका उद्देश्य इसे अन्य चिकित्सा प्रणालियों से अलग पहचान देना था। आगे चलकर इसे LMNT – Dr. Lajpat Rai Mehra Neurotherapy के रूप में जाना जाने लगा।
LMNT न्यूरोथेरेपी का मूल सिद्धांत
LMNT न्यूरोथेरेपी इस सिद्धांत पर कार्य करती है कि मानव शरीर एक स्व-नियंत्रित और स्व-उपचार प्रणाली है। जब नसों में किसी कारणवश दबाव, अवरोध या असंतुलन उत्पन्न होता है, तो शरीर के विभिन्न अंग सही तरीके से कार्य नहीं कर पाते।
इस पद्धति में शरीर के विशिष्ट नर्व पॉइंट्स पर नियंत्रित और सुरक्षित दबाव देकर नसों के माध्यम से मस्तिष्क को सही संकेत भेजे जाते हैं। इससे शरीर में रक्त संचार, मांसपेशियों की सक्रियता और आंतरिक संतुलन बेहतर होने में सहायता मिलती है।
किन समस्याओं में न्यूरोथेरेपी सहायक हो सकती है?
Dirghayuveda Wellness में LMNT न्यूरोथेरेपी का उपयोग विभिन्न जीवनशैली और तंत्रिका-सम्बंधित समस्याओं में सहायक उपचार के रूप में किया जाता है:
- कमर दर्द, गर्दन दर्द और कंधों की जकड़न
- सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस और स्लिप डिस्क
- सायटिका और नसों में खिंचाव
- घुटनों और जोड़ों का पुराना दर्द
- पाचन तंत्र और गट से जुड़ी समस्याएँ
- शारीरिक थकान और तनाव से जुड़ी समस्याएँ
Dirghayuveda Wellness में न्यूरोथेरेपी का समग्र दृष्टिकोण
Dirghayuveda Wellness में यह माना जाता है कि प्रत्येक व्यक्ति का शरीर अलग है और उसकी समस्याओं का कारण भी अलग हो सकता है। इसलिए यहाँ न्यूरोथेरेपी को पर्सनलाइज़्ड ट्रीटमेंट प्लान के साथ अपनाया जाता है।
थेरेपी के साथ-साथ रोगी की दिनचर्या, खान-पान, बैठने-उठने की आदतें और जीवनशैली पर भी मार्गदर्शन दिया जाता है। इसका उद्देश्य केवल अस्थायी राहत नहीं, बल्कि दीर्घकालिक स्वास्थ्य संतुलन की ओर ले जाना है।
डॉ. लाजपत राय मेहरा द्वारा विकसित LMNT न्यूरोथेरेपी प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान है। Dirghayuveda Wellness में इस पद्धति को आधुनिक समझ, अनुभव और मानवीय संवेदनशीलता के साथ अपनाया जाता है। यदि आप दवा-मुक्त, प्राकृतिक और संतुलित उपचार की तलाश में हैं, तो न्यूरोथेरेपी एक सार्थक विकल्प हो सकती है।


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