न्यूरोथेरेपी एक प्राकृतिक, दवा-मुक्त और शरीर की आंतरिक प्रणाली पर आधारित उपचार पद्धति है, जिसका विकास भारत के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. लाजपत राय मेहरा द्वारा किया गया। इस चिकित्सा प्रणाली का मूल सिद्धांत यह है कि मानव शरीर स्वयं को स्वस्थ करने की अद्भुत क्षमता रखता है, बशर्ते उसकी आंतरिक कार्यप्रणाली – विशेष रूप से नर्व सिस्टम – सही रूप से कार्य कर रही हो।

Dirghayuveda Wellness में न्यूरोथेरेपी को केवल एक उपचार तकनीक नहीं, बल्कि शरीर-मन-तंत्रिका संतुलन की संपूर्ण प्रक्रिया के रूप में अपनाया जाता है।

न्यूरोथेरेपी का मूल दर्शन

मानव शरीर में होने वाली लगभग सभी जैव-रासायनिक (biochemical) प्रक्रियाएँ नर्व सिस्टम के माध्यम से नियंत्रित होती हैं। भोजन पचना, हार्मोन बनना, रक्त संचार, इम्यूनिटी, मांसपेशियों की सक्रियता – यह सब कुछ मस्तिष्क और नसों के बीच सही संवाद पर निर्भर करता है।

जब किसी कारणवश यह संवाद बाधित हो जाता है – जैसे:

  • गलत खान-पान और जीवनशैली
  • लगातार मानसिक तनाव
  • शारीरिक गतिविधि की कमी
  • गलत पोस्चर या अत्यधिक श्रम
  • नर्व कंप्रेशन या ब्लॉकेज

तो शरीर के अंगों का कार्य धीमा या असंतुलित हो जाता है, जिससे धीरे-धीरे रोग उत्पन्न होने लगते हैं।

न्यूरोथेरेपी कैसे कार्य करती है?

न्यूरोथेरेपी में शरीर के विभिन्न भागों पर स्थित विशिष्ट नर्व पॉइंट्स पर सटीक और नियंत्रित दबाव दिया जाता है। यह दबाव हाथों की उँगलियों और हथेली द्वारा दिया जाता है, जिसमें किसी भी प्रकार की दवा, मशीन या सर्जरी का प्रयोग नहीं होता।

इस प्रक्रिया के माध्यम से:

  • नर्व सिस्टम को सक्रिय किया जाता है
  • रक्त और लसीका (lymph) संचार सुधरता है
  • अंगों तक सही संकेत पहुँचते हैं
  • हार्मोनल संतुलन बेहतर होता है
  • शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है

न्यूरोथेरेपी का उद्देश्य लक्षणों को दबाना नहीं, बल्कि रोग के मूल कारण को ठीक करना है।

दवाओं की तुलना में न्यूरोथेरेपी

आधुनिक चिकित्सा में अधिकतर दवाएँ शरीर के बाहर से दी जाती हैं, जो शरीर के अंदर चल रही प्रक्रियाओं को अस्थायी रूप से नियंत्रित करती हैं। लंबे समय तक दवाओं के सेवन से साइड इफेक्ट्स की संभावना बनी रहती है, जैसे:

  • लिवर और किडनी पर दबाव
  • हार्मोनल असंतुलन
  • इम्यून सिस्टम की कमजोरी
  • नई समस्याओं का उत्पन्न होना

इसके विपरीत, न्यूरोथेरेपी शरीर को बाहर से नियंत्रित नहीं करती, बल्कि अंदर से सक्रिय करती है। इसमें किसी भी प्रकार की दवा या रसायन का उपयोग नहीं होता, इसलिए यह एक सुरक्षित और प्राकृतिक पद्धति मानी जाती है।

न्यूरोथेरेपी किन समस्याओं में सहायक हो सकती है?

Dirghayuveda Wellness में न्यूरोथेरेपी को निम्नलिखित स्थितियों में सहायक उपचार के रूप में अपनाया जाता है:

  • कमर, गर्दन और पीठ दर्द
  • सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस
  • स्लिप डिस्क और सायटिका
  • जोड़ों का दर्द और जकड़न
  • पाचन समस्याएँ – गैस, कब्ज, एसिडिटी
  • थायरॉइड असंतुलन से जुड़ी समस्याएँ
  • हार्मोनल असंतुलन
  • महिलाओं में मासिक धर्म से जुड़ी समस्याएँ
  • शारीरिक कमजोरी और थकान

पाचन और हार्मोनल संतुलन में भूमिका

न्यूरोथेरेपी यह मानती है कि पाचन तंत्र सही होगा तो शरीर में आवश्यक हार्मोन और पोषक तत्व अपने-आप संतुलित होने लगते हैं। उदाहरण के लिए:

यदि आंतें (intestines) सही से कार्य नहीं कर रहीं, तो कैल्शियम, आयरन या अन्य मिनरल्स का अवशोषण ठीक से नहीं होता, चाहे व्यक्ति कितनी भी दवाइयाँ क्यों न ले।

न्यूरोथेरेपी में पाचन तंत्र से जुड़ी नसों को सक्रिय करके इस मूल समस्या को ठीक करने का प्रयास किया जाता है।

महिलाओं के स्वास्थ्य में न्यूरोथेरेपी

महिलाओं में हार्मोनल बदलाव, थायरॉइड, पीसीओडी, फाइब्रॉइड, सिस्ट और मासिक धर्म की अनियमितता आम समस्याएँ हैं। न्यूरोथेरेपी में संबंधित नर्व पॉइंट्स को सक्रिय कर:

  • हार्मोनल संतुलन में सुधार
  • रक्त संचार बेहतर
  • पेल्विक क्षेत्र की नसों को सक्रिय

करने पर ध्यान दिया जाता है, जिससे शरीर की प्राकृतिक रिकवरी प्रक्रिया शुरू हो सके।

न्यूरोथेरेपी एक ऐसी प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति है जो शरीर को बाहर से नियंत्रित करने के बजाय अंदर से मजबूत बनाती है। Dirghayuveda Wellness में इसे अनुभवी मार्गदर्शन, वैज्ञानिक समझ और मानवीय संवेदनशीलता के साथ अपनाया जाता है।

यदि आप दवा-मुक्त, सुरक्षित और दीर्घकालिक स्वास्थ्य संतुलन की ओर बढ़ना चाहते हैं, तो न्यूरोथेरेपी एक सार्थक विकल्प हो सकती है।